मैं भाव-सूची उन भावो की, जो बिक़ेसदा ही बिन तोले ,
तन्हाई हूँ हर उस ख़त की, जो पढ़ा गया है बिन खोले ,
हर आंसू को, हर पत्थर तक पहुचाने की लाचार हूक ,
मैं सहज अर्थ उन शब्दों का जो सुने गए हैं बिन बोले ,
जो कभी नहीं बरसा खुल कर ,हर उस बादल का पानी हूँ ,
लव कुश की पीर बिना गाई ,सीता की राम कहानी हूँ...!
जिनके सपनों के ताजमहल ,बनने से पहले टूट गए ,
जिन हाथों में दो हाथ कभी ,आने से पहले छूट गए ,
धरती पर जिनके खोने और ,पाने की अजब कहानी है ,
किस्मत की देवी मान गई ,पर प्रणय देवता रूठ गए ,
मैं मैली चादर वाले उस कबिरा की अमरित-बानी हूँ......!
लव कुश की पीर बिना गाई ,सीता की राम कहानी हूँ...!!
कुछ कहते हैं मैं सीखा हूँ, अपने जख्मो को खुद सी कर ,
कुछ जान गए मैं हँसता हूँ, भीतर-भीतर आसूँ पीकर ,
कुछ कहते हैं मैं हूँ, विरोध से उपजी एक खुद्दार विजय ,
कुछ कहते हैं मैं रचता हूँ, खुद में मर कर खुद में जी कर ,
लेकिन मैं हर चतुराई की, सोची-समझी नादानी हूँ.........!
लव कुश की पीर बिना गाई ,सीता की राम कहानी हूँ...